Saturday, March 27, 2010

मिलने जब आउंगा

सुन लो हे प्राणप्रिये , मिलने जब आउंगा ।
सारी रात पूनम की , जाग कर बिताउंगा ॥

रास्ते में चलते चलते , लोग ठहर जायेंगे ।
और सारे भौंरे भी राह भूल जायेंगे ।
 खुशबुएं लुटाउंगा , बाग इक बनाउंगा ।
तेरी जुल्फ फूलों से , इस तरह सजाउंगा ॥

कर के मुझे मदहोश , जब झुमाना चाहोगी ।
मुझको जाम प्याले से , जब पिलाना चाहोगी ।
मैं उसे हटा दुंगा , कुछ करीब आउंगा ।
अधरों से अधरों को , एक में मिलाउंगा ॥

बादलों के पीछे से , चाँद कैसे निकला था ।
ये अंधेरा रोशनी में , धीरे धीरे बदला था ।
लोगों को बताउंगा , करके मैं दिखा दुंगा ।
तेरे रुख से घूंघट को , धीरे से उठाउंगा ॥

43 comments:

पी.सी.गोदियाल said...

वाह-वाह बहुत खूब , शुरू की दो पंक्तियाँ दिल को छुं गई अजय जी !

kunwarji's said...

बहुत ही बढ़िया!
पर माफ़ करना,अधूरी सी लग रही है!
मतलब और पढने को मन कर रहा था कि ख़त्म हो गयी!
कुंवर जी,,

डॉ टी एस दराल said...

रात , पूनम , प्रिये ---ये कहाँ आ गए हम !
प्रेम पत्री पढ़कर कहीं खो से गए हम ।

संजय भास्कर said...

वाह-वाह बहुत खूब , शुरू की दो पंक्तियाँ दिल को छुं गई अजय जी !

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

दिगम्बर नासवा said...

कर के मुझे मदहोश , जब झुमाना चाहोगी
मुझको जाम प्याले से , जब पिलाना चाहोगी ..

बहुत खूब ... प्रेम की मस्ती में झूम कर लिखा ... दिल से निकला गीत .. बेहद लाजवाब है ...

M VERMA said...

सारी रात पूनम की , जाग कर बिताउंगा ॥
सुन्दर रूमानी रचना
बेहतरीन्

Kusum Thakur said...

रास्ते में चलते चलते , लोग ठहर जायेंगे ।
और सारे भौंरे भी राह भूल जायेंगे ।
खुशबुएं लुटाउंगा , बाग इक बनाउंगा ।
तेरी जुल्फ फूलों से , इस तरह सजाउंगा ॥

बहुत सुन्दर !

Udan Tashtari said...

वाह जी, बेहतरीन कल्पनालोक में परियोजना को उकेरा है..बढ़िया है.

vikas said...

बहुत ही सुन्दर श्रंगार रस में हमें भी डूबो दिया आपने ,,,
विकास पाण्डेय
www,vicharokadarpan.blogspot.com

Shah Nawaz said...

बहुत खूब अजय जी! बेहतरीन्

Manoj Bharti said...

सुंदर रचना !!!

sangeeta swarup said...

कोमल एहसासों से भरी सुन्दर अभिव्यक्ति

ताऊ रामपुरिया said...

सुन लो हे प्राणप्रिये , मिलने जब आउंगा ।
सारी रात पूनम की , जाग कर बिताउंगा ॥


बेहद खूबसूरत. शुभकामनाएं.

रामराम.

मनोज कुमार said...

सुन लो हे प्राणप्रिये , मिलने जब आउंगा ।
सारी रात पूनम की , जाग कर बिताउंगा ॥
बहुत अच्छी कविता।

JHAROKHA said...

रास्ते में चलते चलते , लोग ठहर जायेंगे ।
और सारे भौंरे भी राह भूल जायेंगे ।
खुशबुएं लुटाउंगा , बाग इक बनाउंगा ।
तेरी जुल्फ फूलों से , इस तरह सजाउंगा ॥

bahut hi khoob surat post.

Babli said...

बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ उम्दा प्रस्तुती! बधाई!

ana said...

maza aa gaya

Dr. Smt. ajit gupta said...

युवकोचित बात अच्‍छी लगी। उपदेश देकर बूढे मत बनना। बधाई।

SAMVEDANA KE SWAR said...

आज कल मुक्तछंद की कविता के दौर में आपकी गेय शैली की कविता ऋंगार रस से सराबोर एक अलग ही आनंद प्रदान करती हैं.

अनामिका की सदाये...... said...

arey to itne din se isliye gaayab the???

wah pyar se sarbor bahut pyari rachna likh dali is antraal me...bahut khoob.

badhayi.

दीपक 'मशाल' said...

श्रृंगार रस को बहुत ही रसमय कर दिया आपने.. मज़ा आगया पढ़ कर अजय सर.

आशीष/ ASHISH said...

Romaani! Umda!
Lekin mujhe bhi aisa laga ki anayaas hi rachna samaapt ho gayee!
Is paapi ko aur ummeed thi!
Shringaar-ras se sarabor hote-hote reh gaya!

CS Devendra K Sharma said...

raseeli.....rangeeli....aur mast rachna..........mazaa aa gaya

kuch yaad aa raha hai...."maikade band karde laakh jamaane waale.........shahar me kam nahi hai ankho se pilaane waale"!!!!!!!!!

anil gupta said...

बहुत ही शानदार लिखा आपने। मज़ा आगया

अरुणेश मिश्र said...

प्रशंसनीय ।

naresh said...

अजय कुमार जी
आप ने मिलने जब आउगा बहुत good लिखा

Shri"helping nature" said...

lovly...........

alka sarwat said...

रास्ते में चलते चलते , लोग ठहर जायेंगे
और सारे भौंरे भी राह भूल जायेंगे ।
बहुत ताकतवर है भाई आपका प्यार
और उसे बयाँ करने का ये मासूम अंदाज

akelahoon said...

thanx

shandar prastuti aur shabdon ke umda chayan ke liye badhai.

Dikshit Ajay K said...

महोदय,

पिछले कई दशक से हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा देने के सम्बन्ध में एक निर्थक सी बहस चल रही है. जिसे कभी महिला वर्ष मना कर तो कभी विभिन्न संगठनो द्वारा नारी मुक्ति मंच बनाकर पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाता रहा है. समय समय पर बिभिन्न राजनैतिक, सामाजिक और यहाँ तक की धार्मिक संगठन भी अपने विवादास्पद बयानों के द्वारा खुद को लाइम लाएट में बनाए रखने के लोभ से कुछ को नहीं बचा पाते. पर इस आन्दोलन के खोखलेपन से कोई भी अनभिज्ञ नहीं है शायद तभी यह हर साल किसी न किसी विवादास्पद बयान के बाद कुछ दिन के लिए ये मुद्दा गरमा जाता है. और फिर एक आध हफ्ते सुर्खिओं से रह कर अपनी शीत निद्रा ने चला जाता है. हद तो तब हुई जब स्वतंत्र भारत की सब से कमज़ोर सरकार ने बहुत ही पिलपिले ढंग से सदां में महिला विधेयक पेश करने की तथा कथित मर्दानगी दिखाई. नतीजा फिर वही १५ दिन तक तो भूनते हुए मक्का के दानो की तरह सभी राजनैतिक दल खूब उछले पर अब १५ दिन से इस वारे ने कोई भी वयान बाजी सामने नहीं आयी.

क्या यह अपने आप में यह सन्नाटा इस मुद्दे के खोख्लेपर का परिचायक नहीं है?

मैंने भी इस संभंध में काफी विचार किया पर एक दुसरे की टांग खींचते पक्ष और विपक्ष ने मुझे अपने ध्यान को एक स्थान पर केन्द्रित नहीं करने दिया. अतः मैंने अपने समाज में इस मुद्दे को ले कर एक छोटा सा सर्वेक्षण किया जिस में विभिन्न आर्थिक, समाजिक, राजनैतिक, शैक्षिक और धार्मिक वर्ग के लोगो को शामिल करने का पुरी इमानदारी से प्रयास किया जिस में बहुत की चोकाने वाले तथ्य सामने आये. २-४०० लोगों से बातचीत पर आधारित यह तथ्य सम्पूर्ण समाज का पतिनिधित्व नहीं करसकते फिर भी सोचने के लिए एक नई दिशा तो दे ही सकते हैं. यही सोच कर में अपने संकलित तथ्य आप की अदालत में रखने की अनुमती चाहता हूँ. और आशा करता हूँ की आप सम्बंधित विषय पर अपनी बहुमूल्य राय दे कर मुझे और समाज को सोचने के लिए नई दिशा देने में अपना योगदान देंगे.

http://dixitajayk.blogspot.com/search?updated-min=2010-01-01T00%3A00%3A00-08%3A00&updated-max=2011-01-01T00%3A00%3A00-08%3A00&max-results=6
Regards

Dikshit Ajay K

Mrs. Asha Joglekar said...

क्या बात है अजय जी खासा रोमांटिक मूड है ।

राइना said...

nice

Mayur Malhar said...

बहुत ही उम्दा रचना है.

akelahoon said...

bahut sunder cha gaye sirji

Amit kumar said...

acha hai zanab

उम्दा सोच said...

ओफ्फो आप ने ग़दर ढा दिया ... कातिल लेख !!!

dipayan said...

बहुत खूब । प्यार का रस छलकाते रहिये । बधाई ।

नताशा said...

आपकी गठरी में बहुत कीमती सामान है ....ढेरों शुभकामनायें

हिमान्शु मोहन said...

अजय जी!
आप की अगली रचना का इंतज़ार है।

शरद कोकास said...

अजय जी आपमे बहुत पोटेंशियल है , कुछ नई चीज़ों को लेकर रचना कीजिये ।

alok said...

nice one

rgds
alok

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

मैं क्या हूँ ? इसकी तलाश जारी है----
ये तलाश आप कबीर की अनुराग सागर
पङे..पङकर आप को ठीक लगे.. लेकिन लिखे
हुए को प्राप्त कैसे करे..तो मुझसे मिल लेना
सभी मैं माना हुआ है इसके हटते ही सत्य
नजर आने लगता है..मेरी बात के संदर्भ
में आप कबीर की इस रचना को...तेरा
मेरा मनुआ एक कैसे होई रे..मान सकते
है वैसे खुद को जानना सब से आसान है