Saturday, September 19, 2009

विश्व सुन्दरी

ब्लॉग जगत में आज मेरा पहला कदम है ! मन की बातें गठरी से निकलकर आप तक पहुँचती रहेंगी
एक कविता प्रस्तुत है--

संसार की सबसे सुंदर औरत
एक दिन गर्लफ्रेंड ने कहा , एक सवाल करती हूँ सोच कर जवाब देना ,मैं कैसी दिखती हूँ ?
मैंने कहा -इसमे सोचने की क्या है बात ,तू तो है अमावस में भी चाँदनी रात
थोड़े नखरे जरूर करती है पर इस धरती पर तू सबसे सुंदर लगती है
वह लजा गई ,शरमा गई , जाते जाते अपने क्रेडिट कार्ड का बिल थमा गई
मैंने सोचा ,सिर्फ़ तन से सुंदर औरत ,सबसे सुंदर औरत नही हो सकती
मेरे पास पैसे न हों तो एक पल भी नहीं टिक सकती
मेरी पत्नी जो मेरे हर बात का रखती है ख्याल ,
कहती है -अभी बच्चों के लिए खरीदते हैं , मेरे लिए अगले साल
मैं सोचने लगा ,मेरी पत्नी तो तन और मन दोनों से सुंदर है
संसार की सबसे सुंदर औरत तो मेरे घर के अन्दर है
मेरे घर संसार को बहुत प्यार करती है ,हाँ मायके जाना हो तो हमेशा तैयार रहती है
कहती है माँ है तो मायका है ,उसके बनाये खाने का अलग जायका है
मैं भी मानता हूँ की माँ की जगह कोई ले नहीं सकता
ज्यादा की छोड़ो ,उसके जितना प्यार कोई दे नहीं सकता
माँ किसी से कुछ नहीं चाहती है ,सिर्फ़ अपने बच्चों का सुखी जीवन चाहती है
मैं सुन्दरता की परिभाषा नहीं जानता हूँ ,परन्तु प्यार भरे दिलवाले को सुंदर मानता हूँ
जिसके सीने में प्यार का लहराता समंदर है
नि:स्वार्थ,निष्कपट,निश्छल प्यार देने वाली माँ ,इस धरती पर तू सबसे सुंदर है
तो जीवन की इस भाग दौड़ में ,कुछ वक्त निकालते रहना
औरसंसार की सबसे सुंदर औरत का मान सम्मान करते रहना
धन सम्मान खूब कमाना ,माँ का दिल कभी मत दुखाना

12 comments:

उम्दा सोच said...

क्या बात है अजय जी पहली गेंद पर छक्का !!!
आप का स्वागत है, लेखन के नये आयाम स्थापित कीजिये !
शुभकामना

BAD FAITH said...

माँ के कदमो मे हि जन्नत है। बहुत उम्दा ।आप का स्वागत है।
शुभकामना

vimal verma said...

भाई अजय जी,तो आप भी बन गये ब्लॉगर....अच्छा है अब कम से कम आपकी मौलिक रचनाओं से रूबरू होने का मौका मिलेगा...ये कविता भी अच्छी बन पड़ी है...ब्लॉगजगत में आपका स्वागत है......

Mayank Rai said...

स्वागत है अजय जी आपका चुटीला अंदाज पसंद आया
उम्मीद है कि आगे भी कुछ मौलिक रचनायें आप की गठरी
से निकलता रहेगा

Udan Tashtari said...

आपका हिन्दी चिट्ठाजगत में हार्दिक स्वागत है. आपके नियमित लेखन के लिए अनेक शुभकामनाऐं.

एक निवेदन:

कृप्या वर्ड वेरीफीकेशन हटा लें ताकि टिप्पणी देने में सहूलियत हो. मात्र एक निवेदन है.

वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:

डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?> इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये!!.

भंगार said...

mai khuchh likhna cahta hun par likh nhi paata hun

भंगार said...

bicharo ki koii seema nhi hoti
bhut achhi soch ko likha

GATHAREE said...

हौसला अफजाई करने के लिए आप सब का शुक्रिया
उड़न तश्तरीजी मार्गदर्शन के लिया धन्यवाद

Avtar Meher Baba said...

Marvelous!!!
Yours
Chandar Meher
lifemazedar.blogspot.com

Ayush said...

माँ से बढ़कर कोई नहीं

मन का पाखी said...

bahut hi sahi baat kahi aapne...tan se to koi bhi sundar lag sakta hai...par man ki sundarta hi asli sundarta hai...aur phir ma se sundar kaun ho sakta hai..

siddhartha said...

mind boggling......i m stick to my word....vry well dear..these ceations r simply superb specially ur first one[sundar aurat]...keep it up......best wishes