Thursday, July 17, 2014

पुत्र "आयुष" का जन्मदिन ---एक पैगाम ,किशोर वय बच्चों के नाम (अजय की गठरी )

                         ( 73 )
कुछ लोग बड़े ---होते हैं ,कुछ लोग बड़े --हो जाते हैं
कुछ लोग बड़े --बना दिये जाते हैं ,कुछ लोग बड़े --बताये जाते हैं 


कुछ लोगों को ---बड़ा दिखने का, होता है मानसिक रोग |
अपने आस-पास रखते हैं , छोटे लोग ||
अपने से बड़ों को , करते हैं नापसंद |
क्षुद्र मानसिकता वालों के साथ ,रहते हैं एक दायरे में बंद ||
ऐसा करना उनकी मजबूरी है|

बड़े हों न हों ------,दिखना जरूरी है ||
क्योंकि ---जो जैसा दिखता है ,वैसा माना जाता है |
इस दौर का व्यक्ति
आतंरिक नहीं --बाह्य व्यक्तित्व से पहचाना जाता है ||


बेटे --हम कलयुग में निवास करते हैं  |
लोग दूसरों की खबरें अपने पास रखते हैं ||
अक्सर दूसरों के प्रगति-पथ पर खड़े हो जाते हैं |
किसी को नीचा दिखाकर ,क्षण भर को ,बड़े हो जाते हैं ||
ऐसे लोग ----,बड़े जरूर दिखाई पड़ते हैं |
लेकिन , ये --अपनी अंतरात्मा से रोज लड़ते हैं || 


बेटे --अब तुम बड़े हो रहे हो
अच्छा लगेगा ,तुम्हारा बड़े  हो जाना |
कितने भी बड़े हो जाओ ---
वक्त पर अपनो के साथ ,जरूर खड़े हो जाना || 

सुख के अलावा ,दुःख में भी साथ निभाओगे |
तुम वास्तव में --बड़े हो जाओगे ||

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                गठरी पर अजय कुमार
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2 comments:

राजीव कुमार झा said...

बहुत सुंदर.

सुशील कुमार जोशी said...

आयुष के लिये आशीर्वाद और जन्मदिन की शुभकामनाऐंं देर से ही सही । सुंदर रचना ।