Sunday, May 15, 2011

मेरी पचासवीं पोस्ट,तेरा चेहरा---मेरी चिंता(अजय की गठरी)

                       तेरा चेहरा
                   
तेरा चंदा जैसा चेहरा ,आते जाते लोग न देखें ।
तेरी आँखों में मस्ती है ।
इसमें छबि मेरी बसती है ।
आँखों से दिल को लूटे तूं
आँखों से बातें करती है ॥
इन आँखों का राज ये गहरा ,आते जाते लोग न देखें ॥

तुम बिन सावन सूना मेरा ।
बिन प्रियतम मन लगे ना मेरा ।
उड़े हवायें जुल्फ़ें छूकर ।
जुल्फ़ों में मन भटका मेरा ॥
इन जुल्फ़ों का रंग सुनहरा ,आते जाते लोग न देखें ॥

इस चेहरे को यूं न झुकाओ ।
अपना समझो मत शरमाओ ।
तोड़ के दुनिया की रस्मों को ।
मेरी बाहों में आ जाओ ॥
चेहरे पर ये तिल का पहरा ,आते जाते लोग न देखें ॥
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यह मेरी पचासवीं पोस्ट है , हौसला बढ़ाने के लिये सभी का शुक्रिया ।

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गठरी पर अजय कुमार

40 comments:

Sunil Kumar said...

हम तो ५०० वीं पोस्ट और उसके आगे तक आपके साथ है | चेहरे पर तिल एक शेर याद आ गया
अब मै समझा तेरे रुखसार पर तिल का मतलब
दौलते हुश्न पर दरवान बिठा रक्खे है |

वन्दना said...

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (16-5-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

akhtar khan akela said...

ardh shatak post ke liyen bdhaai ...akhtar khan akela kota rajsthan

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

५० वीं पोस्ट की बधाई ...


खूबसूरत अभिव्यक्ति

डॉ टी एस दराल said...

अर्धशतक के लिए बधाई । और इस प्रेम गीत के लिए भी ।

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

आप पचास की बात करते हैं.. अभी तो पता नहीं कितने शून्य और लगने हैं इसके आगे.. मैं तो बस यही कहूँगा कि
इस अजय की गठरी को कोइ छू नहीं सकता,
जिस अजय के गठरी की निगेहबान हैं आँखें!!

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

बहुत सुंदर रचना....
५० वीं पोस्ट की बधाई ...
सतत लेखन की शुभकामनायें....

ehsas said...

बधाई स्वीकार करें। सुनील जी की बातों से सहमत।

मनोज कुमार said...

क्या बात है!
बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति!

Udan Tashtari said...

५० वीं पोस्ट की बधाई एवं शुभकामनाएँ .

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

पति द्वारा क्रूरता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव अपने अनुभवों से तैयार पति के नातेदारों द्वारा क्रूरता के विषय में दंड संबंधी भा.दं.संहिता की धारा 498A में संशोधन हेतु सुझाव विधि आयोग में भेज रहा हूँ.जिसने भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए के दुरुपयोग और उसे रोके जाने और प्रभावी बनाए जाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं. अगर आपने भी अपने आस-पास देखा हो या आप या आपने अपने किसी रिश्तेदार को महिलाओं के हितों में बनाये कानूनों के दुरूपयोग पर परेशान देखकर कोई मन में इन कानून लेकर बदलाव हेतु कोई सुझाव आया हो तब आप भी बताये.

चैतन्य शर्मा said...

५० वीं पोस्ट की ढेर सारी बधाई ....

दर्शन कौर धनोए said...

बधाई जी ५० वी पोस्ट के लिए ...
" इन आँखों की मस्ती के दीवाने हजारो है "...वाह !

Mukesh Kumar Sinha said...

हम भी साथ साथ हैं.............दोस्त...बहुत बधाई...:)
क्या प्यारा सा चेहरा शब्दों में दिखा दिया...:)

BrijmohanShrivastava said...

आंखों से बाते करती है पर से याद आया
मुमकिन है कल जुबानो कलम पर हों बंदिशे
आंखों को गुफतगू का सलीका सिखाइये

सदा said...

इस बेहतरीन प्रस्‍तुति ...के लिये बहुत-बहुत बधाई ।

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया भावपूर्ण रचना अभिव्यक्ति...

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब .. प्रेम की उन्मुक्त रचना ... प्रेम की भाव लिए ... शानदार प्रस्तुति ...

दिगम्बर नासवा said...

५० वीं पोस्ट की बधाई ...

Patali-The-Village said...

५० वीं पोस्ट की बधाई|बहुत ही सुंदर भावाभिव्यक्ति

रजनीश तिवारी said...

तेरा चंदा जैसा चेहरा ,आते जाते लोग न देखें ।
चेहरे पर ये तिल का पहरा ,आते जाते लोग न देखें ॥
बहुत सुंदर रचना ।

ZEAL said...

इस बेहतरीन रचना एवं ५० वीं पोस्ट की बधाई । जुल्फों पर सुन्दर अभिव्यक्ति।

Babli said...

बात तो आपने सही कहा है पर जीतने भी हमारे देश के नेता है सब एक से बढ़कर एक है! चूँकि मैं पांडिचेरी की हूँ इसलिए जयललिता मुख्यमंत्री बनी फिर से इस बात की ख़ुशी हुई!
५० वीं पोस्ट पूरे होने की बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनायें!
इस सुन्दर और शानदार रचना के लिए भी बधाई!

mahendra verma said...

अजय जी,
शानदार 50 वीं पोस्ट की बधाई एवं शुभकामनाएं।

निर्मला कपिला said...

५० वीं पोस्ट की बधाई एवं शुभकामनाएँ .

भंगार said...

इशक,मे जब डूब जाते है……तब कही जा कर

कुछ बयान होता है …।तभी जा कर कोई तिल

नज़र आता है

Vivek Jain said...

५० वीं पोस्ट की बधाई
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

निवेदिता said...

५०वीं पोस्ट की बधाई .....
प्रभावी अभिव्यक्ति .....आभार !

Vivek Jain said...

बहुत सुंदर प्रस्तुति
५० वीं पोस्ट की बधाई विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

M VERMA said...

50वी पोस्ट की बधाई
बहुत सुन्दर पोस्ट

BrijmohanShrivastava said...

बन्धु आपके दूसरे छन्द ने आर सी प्रसाद सिंह जी की याद दिलादी
वर्षा की रिमझिम में मेरी सुध आये, तो
बूंदों की सरगम पर कोई धुन गा लेना

Babli said...

आप करेले की दाल खाकर देखिएगा आपको अच्छा लगेगा! डरने की कोई ज़रुरत नहीं है!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

वाह जनाब, बहुत ही सुन्दर प्यार भरी रचना ... आभार !

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

अर्धशतक के लिए बधाई !

Rachana said...

bhavpurn sunder prastuti
rachana

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

लीगल सैल से मिले वकील की मैंने अपनी शिकायत उच्चस्तर के अधिकारीयों के पास भेज तो दी हैं. अब बस देखना हैं कि-वो खुद कितने बड़े ईमानदार है और अब मेरी शिकायत उनकी ईमानदारी पर ही एक प्रश्नचिन्ह है

मैंने दिल्ली पुलिस के कमिश्नर श्री बी.के. गुप्ता जी को एक पत्र कल ही लिखकर भेजा है कि-दोषी को सजा हो और निर्दोष शोषित न हो. दिल्ली पुलिस विभाग में फैली अव्यवस्था मैं सुधार करें

कदम-कदम पर भ्रष्टाचार ने अब मेरी जीने की इच्छा खत्म कर दी है.. माननीय राष्ट्रपति जी मुझे इच्छा मृत्यु प्रदान करके कृतार्थ करें मैंने जो भी कदम उठाया है. वो सब मज़बूरी मैं लिया गया निर्णय है. हो सकता कुछ लोगों को यह पसंद न आये लेकिन जिस पर बीत रही होती हैं उसको ही पता होता है कि किस पीड़ा से गुजर रहा है.

मेरी पत्नी और सुसराल वालों ने महिलाओं के हितों के लिए बनाये कानूनों का दुरपयोग करते हुए मेरे ऊपर फर्जी केस दर्ज करवा दिए..मैंने पत्नी की जो मानसिक यातनाएं भुगती हैं थोड़ी बहुत पूंजी अपने कार्यों के माध्यम जमा की थी.सभी कार्य बंद होने के, बिमारियों की दवाइयों में और केसों की भागदौड़ में खर्च होने के कारण आज स्थिति यह है कि-पत्रकार हूँ इसलिए भीख भी नहीं मांग सकता हूँ और अपना ज़मीर व ईमान बेच नहीं सकता हूँ.

Sriprakash Dimri said...

अत्यंत ही कोमल प्रेममयी भावपूर्ण कब्यांजलि... ...अपार शुभ कामनाएं ..हार्दिक अभिनन्दन.....

Kunwar Kusumesh said...

प्यारा-सा श्रंगारिक गीत.
मुझे भा गया मेरे मीत.

50 वी.पोस्ट की बधाई.

रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" said...

मेरा बिना पानी पिए आज का उपवास है आप भी जाने क्यों मैंने यह व्रत किया है.

दिल्ली पुलिस का कोई खाकी वर्दी वाला मेरे मृतक शरीर को न छूने की कोशिश भी न करें. मैं नहीं मानता कि-तुम मेरे मृतक शरीर को छूने के भी लायक हो.आप भी उपरोक्त पत्र पढ़कर जाने की क्यों नहीं हैं पुलिस के अधिकारी मेरे मृतक शरीर को छूने के लायक?

मैं आपसे पत्र के माध्यम से वादा करता हूँ की अगर न्याय प्रक्रिया मेरा साथ देती है तब कम से कम 551लाख रूपये का राजस्व का सरकार को फायदा करवा सकता हूँ. मुझे किसी प्रकार का कोई ईनाम भी नहीं चाहिए.ऐसा ही एक पत्र दिल्ली के उच्च न्यायालय में लिखकर भेजा है. ज्यादा पढ़ने के लिए किल्क करके पढ़ें. मैं खाली हाथ आया और खाली हाथ लौट जाऊँगा.

मैंने अपनी पत्नी व उसके परिजनों के साथ ही दिल्ली पुलिस और न्याय व्यवस्था के अत्याचारों के विरोध में 20 मई 2011 से अन्न का त्याग किया हुआ है और 20 जून 2011 से केवल जल पीकर 28 जुलाई तक जैन धर्म की तपस्या करूँगा.जिसके कारण मोबाईल और लैंडलाइन फोन भी बंद रहेंगे. 23 जून से मौन व्रत भी शुरू होगा. आप दुआ करें कि-मेरी तपस्या पूरी हो

सागर said...

congratulation... acchi rachna...