Sunday, August 28, 2011

फिर चाहत का घर टूटा है-----(अजय की गठरी)

                                 -५५-

दिन भर तेरी याद का आलम ,उलझन भी तन्हाई भी ।
उस पर ये पूनम की रातें ,सावन की पुरुवाई भी ॥

अब तो वक्त कटेगा मेरा ,उन आँखों की चाहत में ।
जिनमें है खंजर की ताकत ,झीलों की गहराई भी ॥

तुम बतलाओ क्या बोलूं मैं , करूं शुक्रिया या शिकवा ।
तुमसे मिलकर चैन भी आता , तुमने नींद उड़ाई भी ॥

कैसे तुमने दिल को लूटा , किसका किसका जिक्र करें ।
कातिल आँखें ,नागिन जुल्फें ,मस्त मस्त अंगड़ाई भी ॥

इश्क में दवा वही देता है , दर्द बढ़ाने वाला जो ।
जिसने आग लगाई तन में , उसने आग बुझाई भी ॥

मुझसे मिलने की खातिर तो ,था उसका बेताब भी दिल ।
हाथ छुआ तो , नजर झुकाकर , मुस्काई सकुचाई भी ॥

वक्त बदल जाता है पल में , वक्त को किसने बांधा है ।
वक्त को मुझसे प्यार आज है , कल होगी रुसवाई भी ॥

कोई यहां पर नहीं किसीका , फिर किसका एतबार करें ।
अंधकार में खो जाती है , ये अपनी परछांई भी ॥

जुदा हुए दो प्यार भरे दिल , कुछ ऐसे हालात हुए ।
मिला रहे थे नजरें जिनसे , उनसे नजर चुराई भी ॥

फिर चाहत का घर टूटा है , कहती हैं ये आवाजें ।
ठंडी आहें ,आँख के आंसू ,सिसकी भी शहनाई भी ॥

मिले बिछड़कर दो प्यासे दिल , लिपट लिपट कर यूं रोये ।
होंठ कांपता हुआ जनवरी , आँखें बनीं जुलाई भी ॥

24 comments:

डॉ टी एस दराल said...

दर्द ए दिल को बयाँ करती सुन्दर ग़ज़ल ।

रेखा said...

आपने तो पंक्तियों के माध्यम से पूरी कहानी बयां कर दी . बहुत खूब ...

Sunil Kumar said...

दर्दे दिल की दवा भी मुहब्बत ही है खुबसूरत ग़ज़ल मुबारक हो .......

kumar said...

बहुत ही खूबसूरत,बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल है...
मदहोश कर डाला....
www.kumarkashish.blogspot.com

शारदा अरोरा said...

tukbandi ke sath achchhi lagi gazal..

वन्दना said...

दर्द से सराबोर बहुत ही गज़ब की लाजवाब गज़ल है।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत गज़ल

मनोज कुमार said...

क्या बात है भाई।
लगता है दिल है आवाज़ मेरी, और आपकी लेखनी।

जिनमें है खंजर की ताकत ,झीलों की गहराई भी ॥
कमाल का भाव।
तुमसे मिलकर चैन भी आता , तुमने नींद उड़ाई भी ॥
अद्भुत!!
कातिल आँखें ,नागिन जुल्फें ,मस्त मस्त अंगड़ाई भी ॥
लाजवाब!!!

महेन्द्र मिश्र said...

अजय जी बहुत सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुति...बधाई...

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है ...बेहतरीन अभिव्‍यक्ति ।

ZEAL said...

Beautiful ghazal !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अब इसे गज़ल कहूँ या गीत .. मगर जो भी है खुदा की कसम लाजवाब है!!

एक स्वतन्त्र नागरिक said...

सबसे अच्छी उपमा तो होठ और आँखों की है.
सचिन को भारत रत्न नहीं मिलना चाहिए. भावनाओ से परे तार्किक विश्लेषण हेतु पढ़ें और समर्थन दें- http://no-bharat-ratna-to-sachin.blogspot.com/

Amrita Tanmay said...

बहुत सुंदर ,लाजवाब ग़ज़ल

वर्ज्य नारी स्वर said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द रचना

mahendra verma said...

दिल की हालत बयान करती अच्छी ग़ज़ल।

रचना दीक्षित said...

दर्द की दास्तान अच्छी लगी. सुदर शब्द और भाव शोभा बढ़ा रहे हैं.लाजवाब प्रस्तुति

Babli said...

सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ लाजवाब ग़ज़ल लिखा है आपने ! आपकी लेखनी को सलाम!

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aaj pehli baar aapke blog pe aana hua..behad accha laga.. aapki bahut bahut sari rachnayein padhin..aapke bibid kayva aayamon se parichit hone ka mauka mila...ghazlon ki bishay bastu aaur shandar radif aaur kafia ka prayog man moh leta hai,,aap mere blog pe aaye aaur mera hausla badhaya iske liye haridk dhanyawad...punah badhayee aaur sadar pranam ke sath

डॉ. जेन्नी शबनम said...

har sher bahut umdaa, shubhkaamnaayen.

दिगम्बर नासवा said...

बेहद खूबसूरत शेर हैं सभी ... दिल के हर अंदाज़ को अलग से बयान किया है ...

Dr (Miss) Sharad Singh said...

मन को उद्वेलित करने वाली मार्मिक ग़ज़ल...

अवनीश सिंह said...

http://premchand-sahitya.blogspot.com/

यदि आप को प्रेमचन्द की कहानियाँ पसन्द हैं तो यह ब्लॉग आप के ही लिये है |

यदि यह प्रयास अच्छा लगे तो कृपया फालोअर बनकर उत्साहवर्धन करें तथा अपनी बहुमूल्य राय से अवगत करायें |

अनुपमा पाठक said...

सुंदर ग़ज़ल!