Friday, May 21, 2010

नासमझ

                   **माफ करना समझने में भूल हुई****



वो रोज़ मुझे आदाब आदाब कहकर मुस्कुराने लगे !!

वो रोज़ मुझे आदाब आदाब कहकर मुस्कुराने लगे!!



एक दिन दाब दिया गला पकड़कर तो छ्टपटाने लगे !


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    (इससे पहले ’सस्ते शेर’ ब्लाग पर प्रकशित हो चुका है )

कुछ दिनों के लिये अपने गाँव जा रहा हूं , ब्लाग-जगत से दूर रहुंगा ।