Saturday, December 5, 2009

इश्क की बात

इश्क की बात हम बताते हैं, एक ताजा गज़ल सुनाते हैं ।
उनकी यादों से सजाया है इसे , प्यार से लोग गुनगुनाते हैं ॥

नाज़ है गुल को अपने किस्मत पे
पहले चूमा गया मुहब्बत से ।
अदा के साथ उसको जूड़े में
हाथ महबूब के लगाते हैं ॥

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥

बाग में आज देखकर उनको
एक छोटा सा शक हुआ मुझको ।
सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥

60 comments:

M VERMA said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥
क्या कहने इस अन्दाज के. बहुत खूब

विनोद कुमार पांडेय said...

इश्क की बात भा गई,
सुंदर गीत दिल पे छा गई,
प्रेम की अभिव्यक्ति और खूबसूरत अंदाज,
क्या कहूँ भाई कविता रास आ गई..

धन्यवाद अजय जी

Amrendra Nath Tripathi said...

क्या बात है ...
खुशबू और रंग उनसे चुरा रहे है गुल ...
मान गए ,,,,,,,,, कुछ भी हो सकता है ... ...

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

alag andaaz mein khoobsoorat kavita ,.........

badhai....

Rohit Singh said...

Kia baat hai manoj bhai .... ishaq ki kai rang yaad aa gaye..apki kavita pad ke.....sukruia shukria.

praneykelekh said...

kafi acchi kavita

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

नाज़ है गुल को अपने किस्मत पे
पहले चूमा गया मुहब्बत से ।
अदा के साथ उसको जूड़े में
हाथ महबूब के लगाते हैं ॥

गजल के तीनों चित्र एक से बढ़कर एक हैं!
सत्यं शिवं सुन्दरम्!

वाणी गीत said...

जुल्फ से खुशबू और रुखसार से रंग चुराते सुन्दर ग़ज़ल लिख दी ...!!

Udan Tashtari said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥


बहुत उम्दा...वाह!! क्या बात है!

मनोज कुमार said...

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥
ग़ज़ल दिल को छू गई।
बेहद पसंद आई।

Yogesh Verma Swapn said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥


lajawaab. nirala andaaz.

डॉ टी एस दराल said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥

ati sundar.

Unknown said...

wat a beautifully lines written by you....
the way u expressed ur feelings...awesome....

Vikas Gupta विकास गुप्ता said...

राहों में न बैठो कि हवा तंग करेगी।
बिछड़े हुए लोगों की सदा तंग करेगी।।
मत टूट के चाहो उसे आगाज़-ए-सफ़र में,
बिछड़़ेगा तो हर एक अदा तंग करेगी।।

बहुत खूब!
जारी रखिए।

Vikas Gupta
vforvictory09@gmail.com

दिगम्बर नासवा said...

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ...

खूबसूरत अल्जाज़ अजय जी ............ गमों की रात चाँद सितारों में बैठ कर ही बीतती है .......

Tarukh said...

Beautifully written. I wish I had the same way with words.

निर्मला कपिला said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥
वाह क्या खूब कही बहुत बहुत बधाई

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥

सुन्दर एवं भावपूर्ण !

Urmi said...

वाह वाह क्या बात है! बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने ! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

भंगार said...

इतनी सुंदर गज़ल लिखी आप ने ...के आप हक़ दार एक
बोसे के ....कोई है तो मांग लीजिएगा ...

VIVEK VK JAIN said...

hiiiiiii,
sir really aap dil se likhte hai.
awesome.........
खुशबू और रंग उनसे चुरा रहे है गुल ...
bahut khoob sir.....

शरद कोकास said...

गज़ल ताज़ा है लेकिन इस्क की बात तो पुरानी है

सदा said...

बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

डा0 हेमंत कुमार ♠ Dr Hemant Kumar said...

अजय जी,
बहुत उम्दा गजल है आपकी---।
हेमन्त कुमार

Anonymous said...

pyar ka makhmali ahsas chupa hai aap ki kavita me bahot badiya

Asha Joglekar said...

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥
प्रेम की इतनी हसीन अभिव्यक्ती ।
बहुत सुंदर ।

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

Md Shadab said...

nice plz read my blog also www.mdshadab.blogspot.com

योगेन्द्र मौदगिल said...

Wahwa..kya baat hai..

CHANDAN said...

अजय भाई, पहले तो ब्लॉग सेटिंग्स सुधार बताने के लिए धन्यवाद...इसी बहाने आपके ब्लॉग पर आया..दिल को छूने वाली रचना

padmja sharma said...

अजय जी
प्रेम और याद की बदौलत ही मनुष्य मनुष्य है . बना रहे बस .

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत खूब...

dweepanter said...

बहुत सुंदर रचना
pls visit...
www.dweepanter.blogspot.com

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह......बहुत खूबसूरत है इश्क की बात

Apanatva said...

badee hee pyaree rachana hai .

शमीम said...

रचना बहुत अच्छी लगी । बहुत बढ़िया। आपके ब्लाग पर आकर मैं कुछ सीखकर ही जाता हूं । धन्यवाद...

शोभना चौरे said...

umda gajal

CHANDAN said...

पढ़ कर अच्छा लगा

Arshia Ali said...

अजय जी, आपने बहुत ही प्यारी गजल कही है।
------------------
ये तो बहुत ही आसान पहेली है?
धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।

Pushpendra Singh "Pushp" said...

बहुत ही अच्छी रचना
बहुत-२ आभार

कडुवासच said...

... अतिसुन्दर !!!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत हसीन, ज़हीन गज़ल है.

matukjuli said...

प्रिय अजयजी
प्रणाम. वह किताब आउट आॅफ प्रिंट है. मैं कई लाइब्रेरियों में खोजूँगा. अगर मिलेगी तो आज शाम में आपको सूचित करूँगा.
धन्यवाद सहित
मटुक नाथ
फोन-09334149605

प्रदीप जिलवाने said...

खुशी हुई आप मेरे ब्लॉग पर आये और अपनी सहायता दी. धन्‍यवाद. आपका ब्‍लॉग भी देखा, अच्‍छा लगा. अब सम्‍पर्क बना रहेगा. आपका ई-मेल नहीं मिला सो यहीं अपना मेसेज भेज रहा हूं. कृपया हो सके तो delete कर दीजिएगा.

प्रदीप जिलवाने said...

कृपया हो सके तो अपना ई-मेल बतायें. मेरी एक और समस्‍या है जिसका निराकरण जरूरी है.

Dr. kavita 'kiran' (poetess) said...

बाग में आज देखकर उनको
एक छोटा सा शक हुआ मुझको ।
सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥
***********sunder band hai. mere blog per aap aaye shukriya.

रचना दीक्षित said...

प्रेम में लिपटी दिल को छू जाने वाली बहुत सुंदर भाव समेटे हुए अक अच्छी रचना

Unknown said...

What a Beautifully lines written by you
thanks

उम्दा सोच said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥

आप की रचना लाजवाब ,खूबसूरत ख्याल और अंदाज़ निराला !!!

Shashi Bhushan Tamare said...

अजय जी,

कमाल की लोह लेखनी है आपकी ! गजल के प्रत्येक पंक्तियों के साथ उत्तरार्ध पूरा न्याय देता है / विचारो की सरस माला गुंथी है आपने और आखरी पंक्तिया गुलदस्ते के अंदर फूलो के राजा गुलाब जैसी शोभा बढ़ाने वाली है /

सुन्दर रचना के लिए तहे दिल से शुक्रिया /

Harish Jharia said...

बहुत अच्छी रचना है।
हमारे ब्लाग में आने के लिये धन्यवाद्।

- हरीश झारिया
"डिस्कवर लाइफ़"
http://harishjhariasblog.blogspot.com/

aajay said...

khoob khoob aur bhaut khoob aap ki kavitayen pad ke apne bachpan aur jawani sab yaad aa jaten hain

Arshia Ali said...

रूमानी जज्बों की सुंदर अभिव्यक्ति।
------------------
जिसपर हमको है नाज़, उसका जन्मदिवस है आज।
कोमा में पडी़ बलात्कार पीडिता को चाहिए मृत्यु का अधिकार।

Harish Jharia said...

बेहतरीन रचना है…

दो कदम वो मेरी जानिब आए थे ये सोचकर
दो कदम मै भी चलूंगा यूं सफ़र हो जाएगा
और तूफ़ां में मेरे उल्टे ही प्ड़ते थे कदम
मैं कदम रखता गया यूं फ़ासला बढ़ता गया

- हरीश झारिया

Pawan Kumar said...

सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥
अच्छा प्रयोग है......

संजय भास्‍कर said...

बहुत खूब .जाने क्या क्या कह डाला इन चंद पंक्तियों में

Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

अजय जी, क्या दृश्य दिखाया है.
यह अंदाज़ तो सबसे जुदा है. बहूत खूब!!

फूल, कलियाँ, खुशबू, हवाएं.....इश्क में बहार की बातें....-सुलभ

Kusum Thakur said...

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥

बहुत खूब !!

संजय भास्‍कर said...

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥

सुन्दर एवं भावपूर्ण !

Unknown said...

आप का गीत गज़ल से इश्क पुराना लगता है
गीत गज़ल तो बातों के कह जाने का इक बहाना लगता है
आप अपनी बातो को यू कह जाते है सरलता से
अब तो बंदा भी आप के लेखनी का दिवाना लगता है

बहुत अच्छा लिखते है आप स्वागत है आपका हमारी तरफ से भी