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Sunday, July 31, 2011

जिसने तेरी ज़ुल्फों में------(अजय की गठरी)

                        -५४-
जिसने तेरी ज़ुल्फों , में ये फूल लगाया है।
उसने तुम्हें चाहा है , दिल मेरा जलाया है॥

जी भर के मैंनें चूमा , जो फूल तुमने भेजा।
मैंनें तेरे तोहफे को , सीने से लगाया है॥

हर पूछने वाले से , इतना ही कहुंगा मैं।
मैंनें तुम्हें चाहा है , इस दिल में बसाया है॥

वो कभी हो नहीं सकता है , खुशी से पागल।
अदब से जिसने भी , गम को गले लगाया है॥

वो जिससे उम्र भर , जलते रहे , फरेब किया।
वो शख्स आज अब , मरने पे याद आया है॥

Saturday, March 27, 2010

मिलने जब आउंगा

सुन लो हे प्राणप्रिये , मिलने जब आउंगा ।
सारी रात पूनम की , जाग कर बिताउंगा ॥

रास्ते में चलते चलते , लोग ठहर जायेंगे ।
और सारे भौंरे भी राह भूल जायेंगे ।
 खुशबुएं लुटाउंगा , बाग इक बनाउंगा ।
तेरी जुल्फ फूलों से , इस तरह सजाउंगा ॥

कर के मुझे मदहोश , जब झुमाना चाहोगी ।
मुझको जाम प्याले से , जब पिलाना चाहोगी ।
मैं उसे हटा दुंगा , कुछ करीब आउंगा ।
अधरों से अधरों को , एक में मिलाउंगा ॥

बादलों के पीछे से , चाँद कैसे निकला था ।
ये अंधेरा रोशनी में , धीरे धीरे बदला था ।
लोगों को बताउंगा , करके मैं दिखा दुंगा ।
तेरे रुख से घूंघट को , धीरे से उठाउंगा ॥

Saturday, December 5, 2009

इश्क की बात

इश्क की बात हम बताते हैं, एक ताजा गज़ल सुनाते हैं ।
उनकी यादों से सजाया है इसे , प्यार से लोग गुनगुनाते हैं ॥

नाज़ है गुल को अपने किस्मत पे
पहले चूमा गया मुहब्बत से ।
अदा के साथ उसको जूड़े में
हाथ महबूब के लगाते हैं ॥

क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥

बाग में आज देखकर उनको
एक छोटा सा शक हुआ मुझको ।
सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥

Thursday, November 19, 2009

तन्हाई

तन्हा तन्हा सफ़र जिन्दगी का ।
साथ मुझको मिला न किसी का ॥

उनके दामन से निकली जुदाई ।
अब भरोसा नही है किसी का ॥

उनके बिन तारे लगते हैं फीके ।
रंग उतरा सा है चाँदनी का ॥

लोग सजने सँवरने पे घायल ।
मुझ पे बिजली गिरा सादगी का ॥

चन्द टुकड़ों पे बिकने लगा है  ।
क्या भरोसा करें आदमी का ॥

Monday, October 26, 2009

बेवफा

मेरे सामने था प्याला ,और आँख में नमी थी |
मेरी जिंदगी में शायद ,तेरे प्यार की कमी थी ||
मेरे जुल्फ बिखरे बिखरे ,मेरे पांव डगमगाते |
मैं जहाँ भटक रहा था ,वो तुम्हारी ही गली थी||
मुझे दर्द-ए-दिल दिया है ,तूने रास्ता बदलकर |
तेरा प्यार तेरी चाहत ,मेरे साथ दिल्लगी थी ||
वो ग़ज़ल से अच्छी बातें ,और गीत जैसा चेहरा |
कोई शेर क्या कहेगा ,वो खुद ही शायरी थी ||

Wednesday, October 21, 2009

गुजारिश

तकरार नहीं करते ,इंकार नहीं करते
अच्छे मौसम को यूँ ,बेकार नहीं करते |
जब भी पूछा उनसे ,है प्यार तुम्हें मुझसे ?
नज़रें वो झुकाते हैं , इजहार नहीं करते |
क्यों होने लगी तुमको ,परवाह जमाने की
कह दो खुलकर मुझसे ,तुम प्यार नहीं करते |
आहें न भरा करते ,हम आपकी यादों में
तस्वीर अगर होती ,तो चूम लिया करते |
पूनम की रातों को सब प्यार में डूबे थे
जब तुम ही नहीं आये ,हम प्यार किसे करते |
ये सच है नहीं आये ,मिलने के लिए तुमसे
पर ये न समझ लेना ,हम प्यार नहीं करते |
हर एक से मिलते हैं ,हम प्यार मोहब्बत से
बस एक है दिल अपना , दो चार नहीं रखते
ढूंढो ऐसी दुनिया ,इंसान जहाँ पर हों
मजहब में बँटे दर को संसार नहीं कहते |

Thursday, October 15, 2009

कैसा दौर ?

इकरार भी होता है ,इंकार भी होता है |
तुम भी लगालो डुबकी ,ये प्यार का गोता है ||
पहले कभी-कभी था ,अब रोज ये होता है
मैं उसको जगाती हूँ ,वो मुंह फेर के सोता है ||
बच्चे से प्यारी बातें ,पत्नी से मुलाकातें
इस दौर में मुहब्बत , वीकेंड में होता है ||
सबकी उड़ा के खिल्ली ,तूने कहकहा लगाया
तुझ पर हंसा जमाना ,तो दर्द क्यों होता है ||
हो के रहेगा गन्दा ,तू बचाए लाख दामन
जब रास्ता गलत हो ,अंजाम ये होता है ||

Sunday, October 11, 2009

उनके लिए

जिंदगी का अब मजा आने लगा है |
देखकर उनको नशा छाने लगा है ||
फिर बहारों से चमन आबाद है ,
बाग़ में शायद कोई आने लगा है |
दूर हूँ , मजबूरियां हैं इसलिए ,
बेवफा मुझको कहा जाने लगा है |
रात भर बाँहों में रहते हैं मेरे ,
ख्वाब मेरा ये बिखर जाने लगा है |
नज़र तिरछी ,मुंह में ऊँगली .सर झुकाकर ,
प्यार का इकरार हो जाने लगा है |
जबसे रक्खा है ,जवानी में कदम ,
देखिये पर्दा किया जाने लगा है |