इश्क की बात हम बताते हैं, एक ताजा गज़ल सुनाते हैं ।
उनकी यादों से सजाया है इसे , प्यार से लोग गुनगुनाते हैं ॥
नाज़ है गुल को अपने किस्मत पे
पहले चूमा गया मुहब्बत से ।
अदा के साथ उसको जूड़े में
हाथ महबूब के लगाते हैं ॥
क्या करें जिक्र हम , शबे ग़म की
कैसे कटती है रात पूनम की ।
याद के इन हसीन लम्हों में
चाँद तारे ज़मीं पे आते हैं ॥
बाग में आज देखकर उनको
एक छोटा सा शक हुआ मुझको ।
सारे गुल उनके ज़ुल्फ से खुशबू
रंग रुखसार से , चुराते हैं ॥
सूफ़ीमत ...5. सूफ़ीमत का उदय-2
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